कृष्णपिङ्गल संकष्टी पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग…
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन कृष्णपिङ्गल संकष्टी मनाई जाती है। यह दिन भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कृष्णपिङ्गल संकष्टी के दिन गणेश जी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और बिगड़े काम पूरे होते हैं। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि आषाढ़ में किस दिन मनाई जाएगी कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी।
कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Krishnapingala Sankashti Chaturthi 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 03 जुलाई को कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी को मानई जाएगी।
आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत- 03 जुलाई को सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर
आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का समापन- 04 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर
संकष्टी के दिन चन्द्रोदय – रात 09 बजकर 53 मिनट पर
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 07 मिनट से 04 बजकर 47 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 45 मिनट से 03 बजकर 40 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 07 बजकर 22 मिनट से 07 बजकर 42 मिनट तक
सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 05 बजकर 27 मिनट से 11 बजकर 46 मिनट तक
इन बातों का रखें ध्यान
कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और भगवान गणेश का ध्यान करें
दीपक जलाकर आरती करें और व्रत कथा का पाठ करें।
भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा अर्पित करें।
पूजा में लाल फूल, अक्षत, धूप, दीप और चंदन का उपयोग करें।
मोदक या तिल के लड्डू का भोग लगाएं।
व्रत के दौरान सात्विक भोजन का सेवन करें।
व्रत में सेंधा नमक का प्रयोग करें।
किसी से वाद-विवाद न करें।
किसी के बारे में गलत न सोचें।
काले रंग के कपड़े भूलकर भी धारण न करें।
कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी पर क्या दान करें?
कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी के दिन दान करने का अधिक महत्व है। इस दिन पूजा-अर्चना करने के बाद गरीबों या मंदिर में अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चीजों का दान करने से साधक को जीवन में शुभ परिणाम देखने को मिलते हैं।



