होर्मुज की नाकेबंदी से बढ़ सकता है तनाव और तेल संकट
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज के बाहर युद्धपोत तैनात करने से तनाव गहराने लगा है। इससे खाड़ी के समीकरण बदलने के संकेत भी मिलने लगे हैं। अब तक ईरान की अनुमति से गुजरनेवाले जहाज भी इस ओर से गुजरने से परहेज करेंगे।
इसका ताजा उदाहरण होर्मुज की तरफ जा रहे दो पाकिस्तानी जहाज हैं, जिन्होंने ट्रंप के आदेश के मद्देनजर यू-टर्न ले लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका नाकेबंदी का विकल्प अपनाता है, तो इससे न केवल क्षेत्रीय तनाव और बढ़ेगा बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
‘होर्मुज पर ईरान की पकड़ खत्म कर सकता है अमेरिका’
ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक लेख साझा करते हुए लिखा था कि अमेरिका, ईरान की होर्मुज पर पकड़ खत्म कर सकता है। ऐसा ही अमेरिकी नौसेना ने पिछले साल वेनेजुएला के समुद्र में किया था। इससे वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा था।
फारस की खाड़ी में मजबूत हुई अमेरिकी सैन्य तैनाती
लेख में यह भी कहा गया कि अमेरिकी नौसेना के पास इस रणनीतिक जलमार्ग में आवाजाही को नियंत्रित करने की क्षमता है। विशेषज्ञों के अनुसार, फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य तैनाती पहले से मजबूत हो चुकी है। यूएसएस जेराल्ड फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे विमानवाहक पोत क्षेत्र में मौजूद हैं, जिससे अमेरिका की समुद्री निगरानी और नियंत्रण क्षमता और बढ़ गई है।
अगर ईरान अड़ियल रवैया अपना है तो…
लेग्जिंगटन इंस्टीट्यूट की राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ रेबेका ग्रांट के हवाले से कहा गया है कि अमेरिकी नौसेना के लिए यह बहुत आसान होगा कि वह तय करे कि होर्मुज जलडमरूमध्य से कौन-सा जहाज गुजर सकता है और कौन नहीं।
उन्होंने कहा कि 24 घंटे में होर्मुज से 10 जहाज गुजरे हैं, जिसमें एक रूसी झंडे वाला तेल टैंकर भी शामिल था। इसके अलावा कार्गो जहाज भारत और चीन के लिए भी निकले हैं। अगर ईरान अड़ियल रवैया अपनाता है तो होर्मुज के बाहर अमेरिकी नौसेना के पहरे से उस जलमार्ग से आने-जानेवाली हर चीज पर नजर रखी जा सकती है। इसके बाद आप खार्ग द्वीप या ओमान के पास से उस संकरे हिस्से से आगे जाना चाहते हैं तो आपको अमेरिकी नौसेना की अनुमति लेनी होगी।



