न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया उस ‘जीरो कैलोरी स्वीटनर’ का नाम, जिससे न शुगर बढ़ेगी न वजन
सुबह की चाय और बिस्किट के बिना कई लोग अपने दिन की शुरुआत अधूरी मानते हैं। इसी आदत के चलते हम भारतीय जरूरत से ज्यादा चीनी का सेवन कर रहे हैं, जो सेहत के लिए चिंता का विषय है। इसी बात को मद्देनजर रखते हुए अपोलो हॉस्पिटल्स (हैदराबाद) के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखी है। जी हां, 6 फरवरी को उन्होंने ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि सफेद चीनी का सबसे बेहतरीन विकल्प क्या है (Best Zero Calorie Sweetener)।
क्या है चीनी का सबसे सही विकल्प?
डॉ. कुमार के अनुसार, जो लोग मीठा खाना पसंद करते हैं लेकिन सेहत से समझौता नहीं करना चाहते, उनके लिए स्टीविया सबसे अच्छा विकल्प है। उन्होंने इसे सेहत का पावरहाउस बताते हुए इसके कई फायदे गिनाए। डॉ. कुमार ने बताया कि स्टीविया में जीरो कैलोरी होती है, इसलिए यह वजन को कंट्रोल करने के लिहाज से भी बेस्ट साबित होता है।
सबसे खास बात यह है कि स्टीविया ब्लड शुगर या इंसुलिन के स्तर को नहीं बढ़ाता, जिससे यह डायबिटीज के मरीजों के लिए पूरी तरह सेफ है। चीनी के विपरीत, इसका दांतों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। चूंकि, यह सफेद चीनी से काफी ज्यादा मीठा होता है, इसलिए इसकी बहुत ही कम मात्रा की जरूरत पड़ती है। डॉ. कुमार कहते हैं कि इसे चाय और कॉफी में रोज इस्तेमाल किया जा सकता है।
आखिर क्या है स्टीविया?
स्टीविया एक जीरो-कैलोरी स्वीटनर है। यह दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले पौधे Stevia Rebaudiana की पत्तियों से बनता है। वहां के स्थानीय लोग सदियों से इसका इस्तेमाल चाय और दवाइयों को मीठा करने के लिए करते आ रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ दशकों में ही यह सफेद चीनी के एक हेल्दी विकल्प के रूप में पूरी दुनिया में पॉपुलर हुआ है।
डॉक्टर का कहना है कि “मैं अपनी चाय और कॉफी बिना किसी स्वीटनर के लेना पसंद करता हूं, लेकिन मैं जानता हूं कि कई लोगों के लिए फीकी चाय-कॉफी पीना मुश्किल है,” इसलिए स्टीविया उनके लिए एक सेफ ऑप्शन है।
दिन में सिर्फ 6 चम्मच चीनी की है छूट
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सिफारिश की है कि वयस्कों और बच्चों को अपनी चीनी की खपत कुल ऊर्जा के 10% से कम रखनी चाहिए। WHO का सुझाव है कि इसे 5% (लगभग 25 ग्राम या 6 चम्मच प्रतिदिन) से भी नीचे रखने पर सेहत को ज्यादा फायदा मिलता है, लेकिन स्नैक्स और ड्रिंक्स में मौजूद हिडेन शुगर के कारण, ज्यादातर भारतीय इस लिमिट को क्रॉस कर जाते हैं, जिससे मोटापे, टाइप-2 डायबिटीज और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

